अस्थमा और सांस की पुरानी बीमारियाँ: लक्षण, इलाज और बचाव —
Asthma and Chronic Respiratory Diseases: Symptoms, Treatment and Prevention
Medaz Hospital, पटना – आपकी साँसों की हिफ़ाज़त में हम आपके साथ
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता हुआ पलूशन और बदलती आदतें, हमारी सांसों पर बुरा असर डाल रही हैं। अस्थमा, सीओपीडी (COPD), ब्रोंकाइटिस जैसी बिमारियाँ अब आम हो गई हैं — ख़ासकर शहरों में रहने वाले लोगों के लिए।
यह ब्लॉग इन बिमारियों की पहचान, इलाज और बचाव से जुड़ी अहम बातें आसान ज़ुबान में बताएगा, ताकि आप अपने साथ–साथ अपनों की सेहत का भी ख़याल रख सकें।
अस्थमा क्या है?
अस्थमा एक लंबी चलने वाली सांस की बिमारी है जिसमें फेफड़ों की नलियाँ सूज जाती हैं और साँस लेना मुश्किल हो जाता है। इसमें मरीज़ को अचानक “अटैक” भी आ सकता है, जिसमें सांस फूलने लगती है।
अस्थमा के आम लक्षण:
- बार–बार खांसी आना (ख़ासकर सुबह या रात में)
- सीने में जकड़न महसूस होना
- साँस लेते वक़्त सीटी जैसी आवाज़ (घरघराहट)
- हलकी–सी एक्टिविटी में भी साँस फूल जाना
क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (COPD):
सीओपीडी यानी Chronic Obstructive Pulmonary Disease — एक ऐसी हालत होती है जिसमें फेफड़ों की नलियाँ धीरे–धीरे ब्लॉक हो जाती हैं। यह ज़्यादातर स्मोकिंग करने वालों या पलूशन में रहने वालों को होती है।
COPD के लक्षण:
- रोज़ाना खांसी और बलगम आना
- साँस फूलना, खासकर चलते वक़्त
- सीने में भारीपन
- बार–बार थकावट और कमज़ोरी
बीमारियों के आम कारण:
- वायु प्रदूषण (Air pollution)
- धूल, धुआँ, रसायनों से एलर्जी
- स्मोकिंग (सीधा या परोक्ष)
- वंशानुगत कारण (Genetics)
- ठंडी हवा या मौसम में बदलाव
बचाव और कंट्रोल के आसान तरीके:
- धूल, धुआँ, पालतू जानवर और तेज़ खुशबू जैसे ट्रिगर्स से बचें
- डॉक्टर की सलाह से इनहेलर और दवा लेते रहें
- रोज़ सुबह हल्की कसरत करें — जैसे वॉक, योग और प्राणायाम
- स्मोकिंग से दूर रहें — और दूसरों को भी रोकें
- रेगुलर जांच कराते रहें – PFT (फेफड़ों की जांच), एक्स–रे, CT स्कैन आदि
इलाज के विकल्प:
- इनहेलर थेरेपी – सांस की नलियों को खोलने वाली दवा
- नेब्युलाइज़ेशन – सांस लेने में मदद करने वाला उपकरण
- एलर्जी टेस्ट और इम्यून थेरेपी
- फिजियोथेरेपी और ब्रीदिंग एक्सरसाइज
- ज़रूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट या हॉस्पिटल एडमिशन
बच्चों और बुज़ुर्गों में ख़ास ध्यान:
- छोटे बच्चों में बार–बार खांसी को हल्के में न लें
- बुज़ुर्गों को पहले से दूसरी बीमारियाँ होती हैं — ऐसे में सांस की बीमारी और खतरनाक बन सकती है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
Q1: क्या अस्थमा हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
A: नहीं, लेकिन इसे सही देखभाल से पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है और मरीज़ नार्मल ज़िंदगी जी सकता है।
Q2: क्या इनहेलर की आदत लग जाती है?
A: नहीं, इनहेलर कोई लत नहीं है — ये एक ज़रूरी इलाज का हिस्सा है।
Q3: योग और प्राणायाम से फायदा होता है क्या?
A: बिल्कुल! ये फेफड़ों की ताक़त बढ़ाते हैं और सांस लेने की क्षमता सुधारते हैं।
Q4: क्या बच्चों को भी अस्थमा हो सकता है?
A: हाँ, खासकर अगर फैमिली में किसी को अस्थमा है तो रिस्क ज़्यादा होता है।
निष्कर्ष:
सांस की तकलीफ़ को हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक हो सकता है। अगर आपको या आपके किसी अपने को लगातार खांसी, साँस फूलना या सीने में दबाव की शिकायत है — तो बिना देर किए फेफड़ों के एक्सपर्ट से मिलें।
Note: This blog is for informational purposes only and should not replace professional medical advice.
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